कला के विकास के लिए निरंतर अध्ययन और साक्षात अनुभव आवश्यक। पूर्व प्राचार्य समीर चंद प्रधान है

कला के विकास के लिए निरंतर अध्ययन और साक्षात अनुभव आवश्यक। पूर्व प्राचार्य समीर चंद प्रधान है


 श्री‌ प्रधान‌ के‌ व्याख्यान‌ को‌ 100 विद्यार्थियों तथा समस्त‌ स्टाफ ने पूरी‌ तन्मयता से‌ सुना। अपनी ‌आकर्षक‌ प्रस्तुति, दमदार ‌आवाज‌ तथा परिष्कृत भाषा के‌ साथ विभिन्न विधाओं से‌ लिए‌ ग‌ए‌‌ उद्धरणो‌।दृष्टांतों,प्रासांगिक कविताओं , उपयोगी मान्य प्रविधियों से सहज‌ रुप‌ से सुसज्जित‌ श्री‌ प्रधान‌ का‌ ब्याख्यान उपस्थित छात्र छात्राओं तथा‌ शिक्षक समुदाय को बांधे ‌रखने‌ में सफल रहा।अपने व्याख्यान में श्री प्रधान ने छात्र, छात्राओं के व्यक्तित्व विकास हेतु अध्ययन और‌‌,विद्यार्थी‌,अध्ययन क्यों जरुरी,अध्ययन क्या और‌‌ किसका,अध्ययन‌ जीवन का‌ केन्द्र, अस्तित्व के लिए ‌अध्ययन,और साहस‌ से‌‌ विजय‌‌ तक‌ का‌‌ सफर जैसे‌‌ गूढ़ विषयों की‌ व्याख्या‌ अत्यंत सरल और‌ व्यावहारिक‌ तरीके‌ से‌ करके श्रोता‌ समुदाय को आंदोलित ‌कर‌ दिया।कुछ‌ ही‌ समय‌ मे शांत‌ बैठे‌ विद्यार्थियों ने‌ बेहिचक‌ संवाद ‌करना‌ शुरु‌ कर दिया तथा हाल‌ सकारात्मक चर्चा से‌ गूंजने लगा

श्री प्रधान जो‌ कि स्वयं चित्र कला के विशेषज्ञ हैं ‌ने‌ कला‌ के‌ जीवन में ‌महत्व को‌ भी‌ बताया। उन्होंने रेखांकित ‌किया की‌ कलाकार‌ की‌ दृष्टि सामान्य ‌व्यक्ति‌ की‌ अपेक्षा व्यापक होती‌ है, उसके अध्ययन का‌ दायरा बड़ा होता‌ है।कला‌ के‌ विकास के लिए निरन्तर अध्ययन और‌ साक्षात् अनुभव आवश्यक‌ है। उपस्थित विद्यार्थियों तथा शिक्षकों ‌के‌ निवेदन‌ पर श्री प्रधान ने‌ तत्काल‌ आरेखन की‌ विशेषज्ञता‌ को‌ समझाते‌ हुए कुछ‌ शिक्षको‌ं तथा‌ विद्यार्थियों का‌ स्केच व्हाइट बोर्ड‌ पर‌‌ तत्काल‌ बना कर‌ चौंका दिया। अंत‌ में ‌प्राचार्य श्री तुलेंन्द्र सागर‌ ने आभार ‌व्यक्त‌ करते‌ हुए‌ कहा‌ कि‌ श्री प्रधान ‌सर‌नननंवंव02 घण्टे के‌ अल्प‌ समय में ‌जीवन की‌ महत्वपूर्ण‌ बारिकियो‌ को‌ जिस‌ तरह‌ सरलतम‌‌ पद्धति‌ से बताया वह पूरे ‌विद्यालय के‌ लिए‌ अत्यंत‌ उपयोगी‌ है।मेधावी छात्रा‌ नियती ने व्याख्यान को विद्यार्थियों के‌ लिये‌ अत्यंत उपयोगी तथा‌ ज्ञान‌वर्धक बताया‌ तथा पुनः इस तरह के‌ व्याख्यान‌ आयोजित‌ करने‌ का निवेदन‌ किया।इस‌ अवसर‌ पर विद्यालय के विभिन्न ‌विषयो‌ के‌ ब्याख्याता‌ भी उपस्थित ‌रहे

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