मिट्टी के गणेश, पत्तों का श्रृंगार: मारवाड़ी युवा मंच सांकरा और कन्या शाला की छात्राओं ने पेश की पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल
सांकरा: वर्तमान में संपूर्ण क्षेत्र में हर्षोल्लास के साथ मनाए जा रहे गणेश उत्सव की पावन बेला के बीच, मारवाड़ी युवा मंच सांकरा* द्वारा संस्कृति और प्रकृति के अनूठे संगम को दर्शाती एक अत्यंत सराहनीय पहल की गई। मंच के यशस्वी अध्यक्ष शुभम सिंघल के कुशल नेतृत्व में शासकीय पूर्व माध्यमिक कन्या शाला सांकरा में अध्ययनरत छात्राओं के लिए "इको-फ्रेंडली मिट्टी के गणेश निर्माण एवं प्राकृतिक श्रृंगार प्रतियोगिता" का भव्य आयोजन किया गया
इस पावन त्योहार के माहौल में आयोजित प्रतियोगिता में शाला की छात्राओं ने अपनी रचनात्मकता का अद्भुत परिचय दिया। आधुनिकता की चकाचौंध को पीछे छोड़, बच्चों ने पूरी श्रद्धा के साथ अपने कोमल हाथों से पवित्र मिट्टी को सुघड़ आकार देकर विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश की अत्यंत मनमोहक प्रतिमाएं गढ़ीं। केवल इतना ही नहीं, पर्यावरण चेतना का परिचय देते हुए छात्राओं ने बप्पा के आसन और दरबार का श्रृंगार भी रासायनिक सामग्रियों के बजाय प्रकृति के अनमोल उपहारों—ताजे रंग-बिरंगे फूलों और हरी पत्तियों से किया। इस सुंदर दृश्य ने उपस्थित जनसमुदाय का मन मोह लिया और समाज को केमिकल मुक्त, प्रकृति-अनुकूल त्योहार मनाने का एक सशक्त संदेश दिया
यह गरिमापूर्ण आयोजन शाला की *प्रधान पाठिका श्रीमती खेमलता प्रधान एवं विदुषी शिक्षिका श्रीमती पुष्पलता शुक्ला* की आत्मीय व गरिमामय उपस्थिति में संपन्न हुआ। उन्होंने मंच के इस अभिनव प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में कलात्मक विकास के साथ-साथ अपनी सनातन संस्कृति और पर्यावरण के प्रति नैतिक जिम्मेदारी की भावना का बीजारोपण करते हैं
प्रतियोगिता के परिणाम एवं पुरस्कार वितरण:
छात्राओं के बीच कड़े मुकाबले में निर्णायकों द्वारा सर्वश्रेष्ठ कलाकृतियों का चयन किया गया, जिसमें विजेता छात्राओं को मंच द्वारा पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया
प्रथम पुरस्कार: कु. पूनम बाग (कक्षा छठवीं)
द्वितीय पुरस्कार: कु. लिजानंद (कक्षा आठवीं)
तृतीय पुरस्कार: कु. संजना निषाद (कक्षा आठवीं)
एवं अन्य प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार में कॉपी और पेन दिया गया
मंच के अध्यक्ष शुभम सिंघल ने अपने उद्बोधन में कहा कि गणेशोत्सव के इस पावन समय में प्रकृति का संतुलन बनाए रखना हम सबका परम कर्तव्य है। रासायनिक मूर्तियों से होने वाले जल प्रदूषण को रोकने और भावी पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से ही इन नन्हीं छात्राओं को मिट्टी के गणेश बनाने के लिए प्रेरित किया गया है। अंत में सभी विजेता प्रतिभागियों को बधाई देते हुए शाला परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
